Monday, July 6, 2015

मुक्तक : 725 - दुश्मन को मैंने


इक ही न बार बल्कि बार-बार किया है ॥
यूँ ही नहीं हमेशा यादगार किया है ॥
मत कोई मेरी बात पर यक़ीन करे पर ,
दुश्मन को मैंने अपने सच ही प्यार किया है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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मुक्तक : 948 - अदम आबाद

मत ज़रा रोको अदम आबाद जाने दो ।। हमको उनके साथ फ़ौरन शाद जाने दो ।। उनसे वादा था हमारा साथ मरने का , कम से कम जाने के उनके बाद जाने दो ...