Saturday, May 23, 2015

मुक्तक : 717 - कतरन ही तो माँगी थी


इक कतरन ही तो माँगी थी पूरा थान नहीं ।।
चाही थी बस एक कली सब पुष्पोद्यान नहीं ।।
पर तुम इक जीरा भी भूखे ऊँट को दे न सके ,
तुमसा कँगला हो सकता दूजा धनवान नहीं ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Friday, May 22, 2015

मुक्तक : 716 - बिना पिए ही चढ़ी


बग़ैर ज़ीना बलंदी , गले लगा चूमी !!
गली हर एक चले बिन , ही जन्नती घूमी !!
वो आके बैठ गए क्या , ज़रा सा पहलू में ,
बिना पिए ही चढ़ी , ज़िंदगी नची-झूमी !!
( ज़ीना=सीढ़ी ,बलंदी=ऊँचाई ,जन्नती=स्वर्ग की ,पहलू=गोद )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Thursday, May 21, 2015

मुक्तक : 715 - पाँवों की ज़िद में ज़िंदगी


पिघली भी होके साँचे में ढाले नहीं ढली !!
लकड़ी यों तर-ब-तर थी कि जाले नहीं जली !!
आँखें थीं , नाक-कान थे , थे हाथ , भी मगर
पाँवों की ज़िद में ज़िंदगी चाले नहीं चली !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Wednesday, May 20, 2015

163 : ग़ज़ल - काँव-काँव अपने ॥


लगते हैं सबको अच्छे कैसे हों ठाँव अपने ?
प्यारे , बुरे भी हों तो ,लगते हैं गाँव अपने ।।1।।
मंज़िल अगर नहीं हो तो आज ही बना लो ,
या आज ही कटाकर रख डालो पाँव अपने ।।2।।
जबसे दिया है उसके हाथों में हमने सूरज ,
तब से उसी के बस में हैं धूप-छाँव अपने ।।3।।
कोयल को ही इजाज़त है याँ पे बोलने की ,
चुपवाओ , करते कौए तुम काँव-काँव अपने ।।4।।
जब जीतते नहीं तो क्यों खेलते जुआ हो ?
क्या हारने लगाते हर बार दाँव अपने ?5।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Tuesday, May 19, 2015

मुक्तक : 714 - कच्ची मदी हूँ ॥


ओस कण दिखता हूँ पर बहती नदी हूँ ॥
रूप से अंगूर सच कच्ची मदी हूँ ॥
दृष्टिकोण अपना बदल लो पाओगे फिर ,
एक छोटा पल नहीं मैं इक सदी हूँ ॥
( मदी = शराब )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Sunday, May 17, 2015

मुक्तक : 713 - मियादी सी आशिक़ी


मुझपे पहले ही ये बात उसने साफ़ कर दी थी ॥
ख़ास शर्तों पे मियादी सी आशिक़ी की थी ॥
ग़म नहीं आज अगर ग़ैर वो हुआ , उसने –
उम्र भर मेरा ही रहने की कब क़सम ली थी ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

मुक्तक : 712 - बल्ब के काँच से पतले


नाम ठोकर का भी ले दो तो टूट जाते हैं ॥
बल्ब के काँच से पतले वो फूट जाते हैं ॥
जब भी मिलते हैं किया करते बात मरने की ,
और दे दो जो इजाज़त तो रूठ जाते हैं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


मुक्तक : 948 - अदम आबाद

मत ज़रा रोको अदम आबाद जाने दो ।। हमको उनके साथ फ़ौरन शाद जाने दो ।। उनसे वादा था हमारा साथ मरने का , कम से कम जाने के उनके बाद जाने दो ...