Saturday, May 4, 2013

मुक्तक : 194 - पिंजरे में


पिंजरे में रह-रहकर सचमुच भूल गया उड़ना ।।
कुछ दिन में तो शायद भूल ही जाऊँगा चलना ।।
जब नामुम्किन ही है आज़ादी तो सोचूँ मैं ,
सीख लिया जाए अब क़ैद में ही खुलकर रहना ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Friday, May 3, 2013

मुक्तक : 193 - पहले थी जो



पहले थी जो ईद सी घट कर मोहर्रम हो गई ॥
शिक्षकों की दिन–ब-दिन इज्ज़त बहुत कम हो गई ॥
मानते थे पहले गुरु को लोग मानिन्दे ख़ुदा ,
अब वो श्रद्धा-आस्था जाने कहाँ गुम हो गई ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


 

मुक्तक : 192 - दुनिया की हर ख़ुशी




( चित्र Google Search से साभार )

दुनिया की हर ख़ुशी समेट ग़म को पीट-पाट ॥ 
कैसी हो ज़िंदगी को चाह दिल से चूम-चाट ॥ 
हालात सामने खड़े हों कितने भी ख़िलाफ़ ,
जीने से न डर कर दे खड़ी मौत की तू खाट ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Thursday, May 2, 2013

मुक्तक : 191 - जिसको रब



जिसको रब रखता उसे फ़िर कौन चखता ॥
और जिसकी आ गई हरगिज़ न बचता ॥
पर सँभलकर ही चलें जीवन में वर्ना ,
हर दफ़ा ग़लती ख़ुदा ना माफ़ करता ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

मुक्तक :190 - क्या गुनह मैंने




क्या गुनह मैंने किया जो चूम बैठा पीठ पर ॥
‘‘किस मी किस मी टच मी टच मी’’ देख लिक्खा पीठ पर ॥
ले चली मुझको पकड़ कर पोलिस इस इल्ज़ाम में ,
रात भर मारेगी मिलकर लात मुक्का पीठ पर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Wednesday, May 1, 2013

मुक्तक : 189 - इतना कम क़ीमत



इतना कम क़ीमत हुआ है मेरे भइया ॥
ये करारा ख़ूबसूरत इक रुपइया ॥
एक दर्जन भर रुपये से कम कहीं भी ,
दो न जब तक फ़ुल नहीं मिलती है चइया ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

मुक्तक : 188 - दुश्मन भी हमसे


दुश्मन भी हमसे बनके हमेशा सगा मिला ॥
हमको कभी वफ़ा न मिली बस दग़ा मिला ॥
जिस दिल को भी चुराने चले शब-ए-स्याह हम ,
उस रोज़ सारी-सारी रात वो जगा मिला ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

मुक्तक : 948 - अदम आबाद

मत ज़रा रोको अदम आबाद जाने दो ।। हमको उनके साथ फ़ौरन शाद जाने दो ।। उनसे वादा था हमारा साथ मरने का , कम से कम जाने के उनके बाद जाने दो ...