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Saturday, August 8, 2015
Friday, August 7, 2015
Thursday, August 6, 2015
Wednesday, August 5, 2015
Tuesday, August 4, 2015
मुक्तक : 741 - आफ़्ताब बनना है ॥
न पूछो मुझसे क्या मुझको जनाब बनना है ?
किसी से सह्ल नहीं सबसे सा’ब बनना है ।।
हँसो न गर तो अभी अपनी आर्ज़ू कह दूँ ?
चराग़ हूँ मैं मुझे आफ़्ताब बनना है !!
( सह्ल=सरल , सा’ब=कठिन ,आर्ज़ू=मनोकामना,आफ़्ताब=सूर्य )
-डॉ. हीरालाल प्रजापति
Monday, August 3, 2015
मुक्तक : 740 - जो बचा लेता ॥
टूटने - गिरने बिखरने से जो
बचा लेता ॥
आँधियों में भी उजरने से जो
बचा लेता ॥
उसको बोलूँ न ख़ुदा तो मैं और
क्या बोलूँ ?
पीलूँ ज़हराब तो मरने से जो बचा
लेता ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति
Saturday, August 1, 2015
मुक्तक : 739 - अच्छा किया ॥
ठीक है मुझसे मुँह फेर
तूने लिया ॥
आगे भी जो भी करना हो
करना पिया ॥
चाहे करना बुरा किन्तु
ऐसा लगे ,
साथ मेरे सदा तूने
अच्छा किया ॥
-डॉ.
हीरालाल प्रजापति
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मुक्तक : 948 - अदम आबाद
मत ज़रा रोको अदम आबाद जाने दो ।। हमको उनके साथ फ़ौरन शाद जाने दो ।। उनसे वादा था हमारा साथ मरने का , कम से कम जाने के उनके बाद जाने दो ...



