Monday, April 22, 2013

मुक्तक : 176 - मेरी जो मोहब्बत


मेरी जो मोहब्बत का है क़िस्सा यों समझ ले ॥ 
होते ही पैदा मर गया बच्चा यों समझ ले ॥ 
करता ही रहा इश्क़ पे मैं इश्क़ मुसल्सल ,
खाता ही रहा पै ब पै धक्का यों समझ ले ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Sunday, April 21, 2013

स्वप्न सुसज्जित................

स्वप्न-सुसज्जित 
झूठी कभी न जगती पर ॥
जीना है मुझको 
यथार्थ की धरती पर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति  

क्या क्या अजीब.....................

क्या क्या अजीब शौक़ लोग पाल कर चलें ?
पैरों में टोप सिर में जूते डाल कर चलें !
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

मुक्तक : 175 - मतलब इतना ही



मतलब इतना ही ज़िंदगानी का ?
सिर्फ़ इक बुलबुला वो पानी का ।।
फ़िर भी सबमें ग़ुरूर छलके है ,
दौलत-ओ-शह्रत-ओ-जवानी का !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

व्यर्थ है सच व्यर्थ है.............



व्यर्थ है सच व्यर्थ है........
जीवन अगर यह नर्क है ?
आत्महत्या के लिए 
इससे बड़ा क्या तर्क है ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

ज़िंदगी उसकी अगर..........

ज़िंदगी  
उसकी अगर रंगीन है ,
इंतिज़ारे मर्ग 
क्यों उसको रहे ?
चश्मा-ए-शाही 
जिसे कहते हैं सब,
फ़िर वो रेगिस्तान 
ख़ुद को क्यों कहे ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति   

ग़ज़ल 86 - की है भलाई..............


की है भलाई या इक अच्छी बुराई कर दी ।।
गेहूँ से घुन अलग था जिसकी पिसाई कर दी ।।
वो कर रहा ज़बरदस्ती साथ में था उसके ,
बदले में हमने उसको उसकी लुगाई कर दी ।।
अफ़्वाह से उठे इक तूफ़ान ने जहाँ में ,
इज्ज़त जो थी हिमालय उनकी वो राई कर दी ।।
लेकर उधार चाहा था खीर ही बनाना ,
आकर किसी ने उसमें नीबू-खटाई कर दी ।।
पहले था ख़ूँ के रिश्तों का कुछ लिहाज़ अदब अब ,
बच्चों ने माँ-पिताजी की भी पिटाई कर दी ।।
माँगी न ग़ैर को दे जो इक तवील मुद्दत ,
हमने वो चीज़ अपनी ऐसे पराई कर दी ।।
पिंजरे से इक परिंदे के भागने पर उसको ,
पहले तो पकड़ा फिर पर काटे रिहाई कर दी ।।
जब ओढ़ने को सर्दी में मिल सका न कुछ तो ,
घुटनों को अपने तन की कम्बल-रजाई कर दी ।।
था एक जनवरी को आने का उनका वादा ,
लेकिन उन्होंने आते-आते जुलाई कर दी ।।
भरने को पेट अपना सब बेचकर किताबें ,
बचपन में बंद हमने अपनी पढ़ाई कर दी ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

मुक्तक : 948 - अदम आबाद

मत ज़रा रोको अदम आबाद जाने दो ।। हमको उनके साथ फ़ौरन शाद जाने दो ।। उनसे वादा था हमारा साथ मरने का , कम से कम जाने के उनके बाद जाने दो ...