Saturday, June 22, 2019

मुक्तक


सब्र से कुर्सी पे भी सच बैठते कब हैं ?
नींद भी लेते खड़े ही लेटते कब हैं ?
हर तरफ़ माहौल बेशक़ ख़ूबसूरत है ,
आँख रखकर भी मगर हम देखते कब हैं ?
 -डॉ. हीरालाल प्रजापति

Monday, June 17, 2019

मुक्तक : 573 - अक़्ल



हैं उसके अक़्ल वाले द्वार बंद देखिए ।।
लेकिन दयालुता भरी पसंद देखिए ।।
करता है आज कौन उल्लुओं से दोस्ती ,
भैंसों से प्यार करता अक़्लमंद देखिए ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति
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Sunday, June 16, 2019

पिताजी


पाँव मुझ लँगड़े के दोनों , हाथ मुझ करहीन के ,
आँख मुझ अंधे की दो , बहरे के दोनों कान हैं ।।
यदि कोई मुझसे ये पूछे , हैं पिताजी क्या तेरे ?
झट से कह दूँगा नहीं कुछ किंतु मेरे प्रान हैं ।।
माँ की महिमा तो जगत में व्याप्त है आरंभ से ,
किंतु क्या माहात्म्य कम है मातृ सम्मुख पितृ का ?
यदि पिताजी पर कोई मुझसे कहे दो शब्द लिख ,
सच तुरत लेकर कलम लिख दूँगा मैं भगवान हैं ।।
- डॉ. हीरालाल प्रजापति

Thursday, May 16, 2019

मुक्त मुक्तक : 899 - ग़ुस्सा


मेरे ग़ुस्से को फूँक - फूँक मत हवा दे तू ।।
मैं भड़क जाऊँ उससे पहले ही बुझा दे तू ।।
मैं बरस उट्ठा तो बहा के दुनिया रख दूँगा ,
अब्र को देख मेरे आस्माँ बना दे तू ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Wednesday, May 8, 2019

मुक्त मुक्तक : 898 - ज़ुर्म


ज़ुर्म वो साज़िशन रोज़ करते रहे ।।
दूसरे उसका ज़ुर्माना भरते रहे ।।
ज़ख़्म तो फूल ही दे रहे थे मगर ,
सारा इल्ज़ाम काँटों पे धरते रहे ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Monday, May 6, 2019

मुक्त मुक्तक : 897 - मैं कहाँ हूँ ?


दिख रहा सबको वहीं बैठा जहाँ हूँ ।।
हूँ वहीं पर वाँ मगर सचमुच कहाँ हूँ ?
दिल मेरा आवारगी करता जिधर है ,
दरहक़ीक़त मैं यहाँ कब ? मैं वहाँ हूँ ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Tuesday, April 30, 2019

मुक्त मुक्तक : 896 - देखते हैं


कि बेख़ौफ़ हो हम न डर देखते हैं ।।
मचल कर तेरी रहगुज़र देखते हैं ।।
तू दिख जाए खिड़की पे या अपने दर पर ,
तेरे घर को भर-भर नज़र देखते हैं ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

मुक्तक : 948 - अदम आबाद

मत ज़रा रोको अदम आबाद जाने दो ।। हमको उनके साथ फ़ौरन शाद जाने दो ।। उनसे वादा था हमारा साथ मरने का , कम से कम जाने के उनके बाद जाने दो ...