Saturday, April 20, 2013

मुक्तक : 174 - बाहर हैं जो


बाहर हैं जो जेलों में गिरफ़्तार नहीं हैं ॥
मतलब न ये इसका वो गुनहगार नहीं हैं ॥
साबित न अदालत में जिनके ज़ुर्म हो सके ,
क्या ऐसे ख़ताकार ख़ताकार नहीं हैं ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Friday, April 19, 2013

मुक्तक : 173 - ट्रेन की भीड़



ट्रेन की भीड़-भाड़ में धँसे गसा-पस में ॥

होके बेखौफ़ ज़माने से टैक्सी बस में ॥ 

आप शायद न जानते हों लेकिन ऐसे भी ,
बनते हैं आशिक़ो महबूब ख़ूब आपस में ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

मुक्तक : 172 - आव देखा न ताव


आव देखा न ताव उनका झट चुनाव किया ॥
पर बहुत देर बाद प्रेम का प्रस्ताव किया ॥
तब तक उनके कहीं पे और लड़ चुके थे नयन ,
अपना ख़त ख़ुद ही फाड़ राह में फैलाव किया ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

85 : ग़ज़ल - ग़मी में एक दिन



ग़मी में एक दिन खुशियाँ , मनाने का चलन होगा ।।
उजालों के लिए शम्मा , बुझाने का चलन होगा ।।1।।
किया करते हैं हम जिस तरह से बर्बाद पानी को ,
कि इक दिन इक महीने में , नहाने का चलन होगा ।।2।।
यूँ ही मरती रहीं गर पेट में ही लड़कियाँ इक दिन ,
कई लड़कों से इक लड़की , बिहाने का चलन होगा ।।3।।
इसी तादाद में खाता रहा गर जानवर इंसाँ ,
किसी दिन आदमी के गोश्त , खाने का चलन होगा ।।4।।
जो रातों रात दौलत मंद अगर सब बनना चाहेंगे ,
तो नंबर दो से ही पैसा , कमाने का चलन होगा ।।5।।
तरक़्क़ी में अगर आड़े ज़मीर आता रहे जब-तब ,
तो इस बेदार रोड़े को , सुलाने का चलन होगा ।।6।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

माँ जगदम्बे.............

चामुंडा , मनसा , नैना , चिंतापुर्णी ,जगदम्बे ॥
काली ,ज्वालामुखी ,वैष्णो , दुर्गे , चंडी , अम्बे ॥
तेरे नाम अनंत किन्तु मैं जाप करूँगा तब जब ,
कर दोगी मेरे दुःख गज़ भर हैं जो मीलों लंबे ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Thursday, April 18, 2013

मुक्तक : 171 - पैर से सिर तक


पैर से सिर तक तू केवल कामिनी का सौंदर्य ॥
इस भरे यौवन में भी संन्यासियों सा ब्रह्मचर्य ॥
इक विकट चुंबक तू मैं सुई पिन सरीखा लोहखण्ड ,
क्यों न खिंचता जाऊँ बरबस करने को मैं साहचर्य ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

मुक्तक : 170 - खुल के दीदार


खुल के दीदार न दो चाहे तुम झरोखे से ॥
हम तुम्हें देख ही लेंगे कहीं भी धोख़े से ॥
एक जैसे ही लगें सब न कोई ख़ास यहाँ ,
तुम ही दिखते हो अनोखे से थोड़े चोखे से ॥
डॉ. हीरालाल प्रजापति 

मुक्तक : 948 - अदम आबाद

मत ज़रा रोको अदम आबाद जाने दो ।। हमको उनके साथ फ़ौरन शाद जाने दो ।। उनसे वादा था हमारा साथ मरने का , कम से कम जाने के उनके बाद जाने दो ...