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Tuesday, January 14, 2020
Monday, January 13, 2020
Saturday, January 11, 2020
Monday, January 6, 2020
Thursday, January 2, 2020
दीर्घ मुक्तक : 944 - दीदार
बाद जाने के तेरे तुझको पता क्या फिर से तेरे ,
लौटकर आने का रस्ता रात-दिन तकते रहेंगे ।।
और कुछ हरगिज़ न बोलेंगे कभी अपनी जुबाँ से ,
सिर्फ़ तेरा नाम ही ईमान से रटते रहेंगे ।।
सख़्त तनहाई हो या महफ़िल हो इससे बेअसर रह ,
हम तेरे दीदार के प्यासे किसी मानिंदे बुत ही ,
इक दफ़ा भी इक पलक झपके बिना तेरी क़सम रे ,
सिर झुका कर बस तेरी तस्वीर ही लखते रहेंगे ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति
Wednesday, January 1, 2020
गीत : 53 - साल नया सबको मुबारक़
हो साल नया सब को मुबारक़ न कहूँगा !!
इस बार में नववर्ष का स्वागत न करूँगा ।।
रंजीदा हूँ , ग़मगीन हूँ , मातम से भरा हूँ ,
बाहर से लगूँ ज़िंदा पर अंदर से मरा हूँ ,
महफ़िल को लगाने दो ठहाकों पे ठहाके ,
मैं तो मज़ाक़ो-मस्ख़री पे भी न हँसूँगा ।।
हो साल नया सब को मुबारक़ न कहूँगा !!
इस सन में यूँ तक़्लीफ़ उठाई है सुनो तो ,
बारिश में पतँग जैसे उड़ाई है सुनो तो ,
उम्मीद की अब भी न किरन सामने मेरे ,
बेरहम मुश्क़िलों से मैं कब तक के लडूँगा ।।
हो साल नया सब को मुबारक़ न कहूँगा !!
सूरत में किसी भी वो किसी हाल में तय थी ,
जिस ख़्वाब की ताबीर इसी साल में तय थी ,
ख़त्म उसकी मियाद हो गई जब कुछ न बचा रे ,
अरमाँ मैं भला क्या कोई अब पाल सकूँगा ?
हो साल नया सब को मुबारक़ न कहूँगा !!
इस बार में नववर्ष का स्वागत न करूँगा ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति
Tuesday, December 31, 2019
गीत : 52 - नववर्ष
किस मुंँह से फिर मनाएँ , नववर्ष का वे उत्सव ।।
जिनको मिली न जीतें , जिनका हुआ पराभव ।।
व्यसनी तो करते सेवन ; हो ना हो कोई अवसर ,
कुछ लोग पान करते ; मदिरा का हर्ष में भर ,
कतिपय हों किंतु ऐसे ,भी लोग सर्वथा जो ;
पीते असह्य दुख में , आकण्ठ डूब आसव ।।
किस मुंँह से फिर मनाएँ , नववर्ष का वे उत्सव ।।
जिनको मिली न जीतें , जिनका हुआ पराभव ।।
जीवन में जिसके संशय ; धूनी रमा के बैठा ,
दुर्भाग्य घर में घुसकर ; डेरा जमा के बैठा ,
जिस मन में व्याप्त कोलाहल-चीत्कार-क्रंदन ,
इक रंच मात्र भी ना पंचम स्वरीय कलरव ।।
किस मुंँह से फिर मनाएँ , नववर्ष का वे उत्सव ।।
जिनको मिली न जीतें , जिनका हुआ पराभव ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति
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मुक्तक : 948 - अदम आबाद
मत ज़रा रोको अदम आबाद जाने दो ।। हमको उनके साथ फ़ौरन शाद जाने दो ।। उनसे वादा था हमारा साथ मरने का , कम से कम जाने के उनके बाद जाने दो ...





