Tuesday, February 25, 2025

ग़ज़ल

 











सच कहता हूॅं हर क्षण , प्रतिपल ,

मैं हूॅं तेरी प्रीत में पागल ।।

तेरी , मेरी क्या तुलना ?  तू ,

स्वर्ण खरा मैं केवल पीतल ।।

मैं भी बजता , बजती तू भी ,

पर मैं घण्टा , तू है पायल ।।

मैं भी सबकी प्यास बुझाता ,

पर तू मदिरा , मैं सादा जल ।।

तेरा मेरा मेल कहाॅं ? तू ,

नील नदी मैं थार मरुस्थल ।।

माना मैं भी पुष्प हूॅं पर सच ,

मैं गुड़हल तू रक्तिम पाटल ।।

मैं गाता भी काक लगूॅं तू ,

चीखे भी तो लगती कोयल ।।

-डाॅ. हीरालाल प्रजापति 



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