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Saturday, February 16, 2019
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मुक्तक : 948 - अदम आबाद
मत ज़रा रोको अदम आबाद जाने दो ।। हमको उनके साथ फ़ौरन शाद जाने दो ।। उनसे वादा था हमारा साथ मरने का , कम से कम जाने के उनके बाद जाने दो ...

5 comments:
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (17-02-2019) को "श्रद्धांजलि से आगे भी कुछ है करने के लिए" (चर्चा अंक-3250) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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अमर शहीदों को श्रद्धांजलि के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
धन्यवाद ! शास्त्री जी ।
सुन्दर | सीने में जल रही ज्वालामुखी को अब ठण्डी न होने देना |कभी सर कट्टे कभी बम के धमाके अब कुछ सहने की हिम्मत नहीं है |कुछ ऐसा करों आम जन की आवाज़ सेना की वर्दी साफा केसरिया पहनों |नेता नहीं देश की बागडोर अपने हाथों में थामों |नमन
सादर
धन्यवाद ! अनिता. सैनी जी ।
धन्यवाद ! Anita Saini जी ।
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