Sunday, February 22, 2026

मुक्तक

 











टूटी-फूटी है न तिड़की है और न चटकी है ।।

अपनी उस एक जगह से तुनुक न सटकी है ।।

उसकी तस्वीर हवा भी न जिसको छू सकती ,

उस बुलंदी पे यूॅं दीवार ए दिल की लटकी है।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

मुक्तक : 948 - अदम आबाद

मत ज़रा रोको अदम आबाद जाने दो ।। हमको उनके साथ फ़ौरन शाद जाने दो ।। उनसे वादा था हमारा साथ मरने का , कम से कम जाने के उनके बाद जाने दो ...